इस दुनिया में गरीब कोई नहीं है, ये कहानी भगवान् बुद्ध के जीवन की है। 

एक समय था। जब भगवान गौतम बुद्ध, एक गाँव में धर्म सभा को संबोधित करने गए थे। जो लोग अपनी-अपनी  परेशानियों परेशान थे, वे लोग अपनी-अपनी परेशानियां लेकर भगवान् बुद्ध के पास जाते और उसका हल प्राप्त करके मनसे बहुत खुश होकर वहां से लौटते थे।

इस भिखारी को, इस तरह एहसास हुआ की लोग बुद्ध के पास दुःखी चेहरे से जाते और प्रसन्न चेहरे से आते है।

जिस जगह भगवान् बुद्ध धर्म सभा को सम्बोधित कर रहे थे, वहां जाने वाला एक रास्ता था। उसी रस्ते के किनारे एक भिखारी बैठा रहता था। और वहासे ही लोग महात्मा बुद्ध के उपदेश शिविर में आया और जाया करते थे। वो भिखारी आने-जाने वाले लोगों की और वो बड़े ध्यान से देखा करता था। उस भिखारी को बड़ा ही आश्चर्य होता था, कि बहुत लोग अंदर तो, बहुत ही दुःखी चेहरें को लेकर जाते है और फिर जब वापस आते है, तो बड़े ही प्रसन्न और खुश होकर आते है।



उस भिखारी को अपने मन की समस्या भगवन बुद्ध के समक्ष रखने का मन हुआ।

उस भिखारी को ऐसा लगा कि, क्यों न में भी अपनी प्रॉब्लम भगवान के समक्ष रखु। यह मन में विचार के साथ वह भी भगवान् बुद्ध के पास पहुंच गया।
भिखारी ने वहां देखा की, लोग क्रमबद्ध खड़े होकर अपनी-अपनी समस्याएं बता रहे थे।
कुछ देर बाद उसकी बारी आयी। भिखारिने सबसे पहले महात्मा बुद्ध को प्रणाम किया। और फिर भिखारी बोला की, इस गाँव के लगभग सभी लोग खुश और समृद्ध है, यहाँ मैं ही क्यो गरीब हूं?
इस बात पर महात्मा बुद्ध मुस्कुराते हुए बोले, तुम गरीब इसलिए हो, क्योंकि तुमने कभी किसीको कुछ दिया ही नहीं। इसलिए तुम गरीब हो।
ये बात सुनकर भिखारी को बड़ा ही आश्चर्य हुआ। और वो भिखारी बोला महात्माजी, मेरे पास दूसरों को देने के लिए कुछ भी नहीं है। में अपना गुजारा बहुत मुश्किल से चला पाता हु। में जब लोगों से भीख मांगता हु, तब मेरा पेट भर पाता हूं। भला में लोगो को कैसे कुछ दे सकता हु।


महात्मा बुद्ध ने उस भिखारिकी परेशानियों का समाधान किया।

महात्मा बुद्ध कुछ देर शांत रहने के बाद उस भिखारिसे कहा, तुम बहुत ही अज्ञानी हो। दूसरों के साथ बाटने के लिए भगवानने तुम्हे बहुत कुछ पहले से ही दिया हुआ है।
तुम्हे भगवानने मुस्कुराहट दी है, जिससे तुम लोगों के मन में नयी खुसी की आशा का संचार कर सकते हो। तुम्हे भगवानने मुँह दिया है, ताकि तुम सभी से दो मीठे शब्द बोल सको, तुम लोगोकी प्रशंसा कर सकते हो। तुम्हे भगवानने दो हाथ दिये है, ताकि तुम लोगों की कुछ मदद कर सको। भगवानने जिसको भी ये चीजें दी है, वह कभी गरीब है ही नहीं। गरीबी का विचार आपके मन में है, यह तो केवल एक भ्रम ही है। इसे तुम अपने मनसे निकाल दीजिये।
ऐसी बाते सुनकर उस भिखारी का मन और चेहरा प्रसन्नता से चमक उठा। और फिर इस उपदेश को अपने जीवन में उतारा, फिर कभी भी वह जीवन में दुखी नहीं हुआ।
इस कथा से हमें ये ज्ञान मिलता है, की हमें भगवानने शरीर दिया है, वो ही हमारा धन है, और हमारे पास धन हो या न हो, हम लोगों को जरुरत पड़ने पर मदद करनेसे, लोगों की प्रसंसा करने से भी हम अमीर कहलायेंगे। ये भी बहुत बड़ा कर्म है।