हम सभी जानते है, महाभारत में गीता का उपदेश दिया था। पर कृष्ण महाभारत में अर्जुन को गीता थे, तब कृष्णा ने अर्जुन से कहा, की वे गीता का उपदेश पहले ही सूर्यदेव (Sun) को दे चुके है। ये सुनते है, अर्जुन ने कहा, की सूर्यदेव (Sun) तो प्राचीन है, तो आपने गीता का ज्ञान सूर्यदेव को कैसे दिया?. तब कृष्ण कहते है, मेरे और तुम्हारे बहुत से जन्म हो चुके है। में उन सभी जन्मो को जानता हु। और मैंने ये भगवद गीता का ज्ञान मैंने पहले ही सूर्य देव को दे दिया था। इस से हम कह सकते है, की सबसे पहले गीता का ज्ञान उपदेश सूर्य देव को दिया।

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सूर्यदेव (Sun) के नाम और उसे अंग्रेजी में क्या कहते है। 

इस सृष्टि को चलने के लिए जैसे वायु, जल और सूर्य की ऊर्जा की जरुरत होती है। सूरज है तो जीवन है। सूरज नहीं तो जीवन नहीं। सूर्यदेव (Sun) के नाम की बात करे तो सूर्यदेव (Sun), सूरज, सूर्य, सूर्य भगवान्, रवि और सूर्य को अंग्रेजी में Sun (सन) कहते है।

सूर्य (Sun) के सात घोड़ों के नाम, और रथ को चलाने वाले सारथि का नाम क्या है।

धार्मिक ग्रंथो और धार्मिक कहानियों के अनुसार सूर्यभगवान के रथ को चलानेवाले साथ घोड़ो के नाम गायत्री, वृहति, उष्णिक, जगती, त्रिष्टुप, अनुष्टुप और पंक्ति है। और सूर्यभगवान के रथ को अरुण नाम के सारथी इसे चलाते हैं।


सूर्यदेव (Sun) की कितनी पत्निया है। और के कितने पुत्र और पुत्री है।

सूर्यदेव (Sun) की दो पत्निया संज्ञा और छाया है। और उनके सात संतान है। सूर्य देव की दो पुत्री है। संज्ञा से ताप्ती और छाया से यमुना है। सूर्य देव के पांच पुत्र है। यमराज, वैवस्वत मनु, शनिदेव, सावर्णि मनु और अश्विनी कुमार है।

भगवद गीता में कितने अद्ध्याय और श्लोक हैं।

भगवद गीता में 18 अद्ध्याय और 700 श्लोक है। 

श्रीकृष्ण की मृत्यु कैसे हुई श्रीकृष्ण की मृत्यु किसने की।

जब महाभारत का युद्ध समाप्त हो चूका था। उसके बाद दुर्योधन की मृत्यु से उसकी माता गांधारी बहुत दुःखी हो गयी। वो अपने पुत्र दुर्योधन के मृत्यु बाद वो राण भूमि में दुर्योधन के शव के पास जाके अपना शोक व्यक्त कर रही थी, तब गांधारी ने कृष्ण भगवान् को श्राप दे दिया था। की कृष्ण की भी मृत्यु हो जायेगी। और फिर कृष्ण भगवान् ने उनका श्राप स्वीकार कर लिया था। फिर ३६ वर्ष बाद श्री कृष्ण भगवन की मृत्यु एक शिकारी के हाथो हो गयी थी।


पांडव कितने थे, और पांडवो के माता-पिता का क्या नाम है।

पांडवो के पिता का नाम पांडु था। और पांडु की दो पत्निया थी एक कुंती और दूसरी माद्री। पांडु राजा के पांच पुत्र थे, इसलिए उन पांचो को पांडव कहते है। युधिष्ठिर, भीमसेन तथा अर्जुन ये तीन पुत्र कुंती के थे। और नकुल और सहदेव ये दोनों माद्री के पुत्र थे। कुंती माता का एक और पुत्र था, जो कुंती जब कुवारी थी तब उसने सूर्य देव की आराधना से एक पुत्र प्राप्त किया था। उसका नाम कर्ण था। कुवारी होने की वजह से उसने कर्ण को एक टोकरी में रखके गंगा के बहते पानी में छोड़ दिया था। बादमे उसे अधिरथ और उनकी पत्नी राधा को कर्ण गंगा नदी से मिला। और फिर उन्होंने कर्ण को बड़ा किया।

धृतराष्ट्र के कितने पुत्र थे।

धृतराष्ट्र की पत्नी का नाम गांधारी था। धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र थे। जिनमे बड़े पुत्र का नाम दुर्योधन था। और उन सौ पुत्रो को कौरव कहते थे। जो की महाभारत की युद्ध में सभी पुत्र वीर गति को प्राप्त हो गए थे।

महाभारत में संजय कौन था।

जब महाभारत का युद्ध सुरु हुआ था। तब राजमहल में बैठकर धृतराष्ट्र को ऋषि व्यास की कृपासे प्राप्त हुई दिव्य दृष्टी से महाभारत के युद्ध की खबर सुनाने वाले व्यक्ति संजय थे।



कर्ण के रथ को चलाने वाला सारथि कौन था।

शल्य नामक व्यक्ति महाभारत के युद्ध में कर्ण के रथ को चलाने वाला सारथि था।

द्रोणाचार्य का प्रिय शिष्य कौन था।

द्रोणाचार्य का प्रिय शिष्य अर्जुन था। वे अर्जुन को दुनिया का सर्व श्रेष्ठ धनुर्धर बनाना चाहते थे।

अर्जुन के रथ का सारथी कौन था ?

महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ का सारथि श्री कृष्ण था।